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Nepali PoetryArticle1 min read

जब सब गिले शिकवे

Pinak_ModhaPinak_Modha October 18, 2021
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जब सब गिले शिकवे मिटाने पड़ते है 
न चाहते हुए भी हाथ मिलाने पड़ते है 

कई बार सबकुछ सच जानते हुए भी 
अजनबी बनकर सर झुकाने पड़ते है 

अपनो को जब स्टेशन छोड़ने जाना होता है 
नम आँखों से ही हाथ हिलाने पड़ते है 

- पिनाक मोढ़ा 

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