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प्रेम और पीड़ा

Payal AnantPayal Anant September 6, 2021
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जो हमसे यथार्थ प्रेम करते हैं... यदि हम उनसे प्राप्त पीड़ाओं को भी उतने ही मन से स्वीकारें जितने मन से उन्हें और उनके प्रेम को स्वीकारते हैं, तो प्रेम उतना जटिल कभी नहीं होगा जितना की हम उसे बना देते हैं। हमें याद रखना चाहिए की जहां प्रेम है वहां पीड़ा भी होगी, पर यह हम पर निर्भर करता है कि पीड़ा के भय से प्रेम और प्रेम करने वाले का परित्याग कर दें या दोनों को ही अपनाकर अपनी जिंदगी में सतरंगी रंग भरें।

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