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कोई मुक्कमल चीज़ हो इस जहाँ में पाने के लिये।

में रात भर जलता रहा उस मोमबत्ती को बुझाने के लिये।


कोई हो तेरा ख़्वाब की इतना हसीन हो,

जो काफी हो मुझे एक चैन की नींद सुलाने के लिये।


जाने कितनों घरो से वास्ता है शहर है तेरे

फिर भी गाँव जाना पड़ता है रिश्ते निभाने के लिये।


बच्चे इस क़दर बड़े हुये की घर से उनको निकाल दिया

जिन्होंने अपना मकान गिरवी रखा था उनको पढ़ाने के लिये।

पवन अशोक

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