बाल कविता (बादल) written by pawan kumar Yadav's image
Poetry1 min read

बाल कविता (बादल) written by pawan kumar Yadav

पवन यादवपवन यादव December 22, 2022
Share0 Bookmarks 31 Reads0 Likes

उमड़ घुमड़ कर बादल आए

हजारों खुशियां संग लाये

काली गठरी में भरकर पानी लाए

गर्मी को ये दूर भगाएं

उमड़ घुमड़ कर बादल आए


प्यासी धरती को अब जल मिलेगा

पेड़ों पर अब फल लगेगा

हर तरफ होगी हरियाली

कहीं किसान तू कहीं खुश होगे वनमाली

मुरझाए फूलों में अब आएगी लाली


सूखे गड्ढों में अब होगा पानी

ऊपर आएंगी मछली रानी

जमीन पर अब तो फिसलेगी पाव

कागज की अब तैरेगी नाव


जंगल में मोर मचाए शोर

नहीं चलेगा अब किसी का जोर

वर्षा होगी अब घनघोर

हम तो चले भैया ठंडी फिजाओं कि ओर।।


।।पवन कुमार यादव ।।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts