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मंज़िल तुम्हारी है

Parul DhirahiParul Dhirahi November 13, 2021
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आगे बढ़ो, बढ़ते रहो
रस्ते कई हैं मंज़िल वही है
बस चलते रहो ।
आये जो दोराहे कभी,
गुमराह ना होना, घबराना नहीं
बस चलते जाना ...
अपनी राह पर, अपने मुक़ाम पर
हर पल आगे बढ़ते जाना ।

आये जो पहाड़ कोई, रास्ता ना बदल लेना
काट के उस पत्थर को अपनी राह बना लेना ।
आऐंगी मुश्किलें कई, राह आसान नहीं होगी,
दर्द होगा, तक़लीफ होगी,
लेकिन, मंज़िल भी वहीं होगी ।

जो ना मिला उसका गिला ना करना,
हौसले बुलंद कर फिर कोशिश करना,
रक़ीब है वो, कुछ सोचा है उसने
बस यही मानकर फिर आगे बढ़ना ।

पहुंचोगे एक दिन तुम उस मुक़ाम पर
वो मंज़िल तुम्हारी होगी,
जिसके हक़दार हो तुम, वो जीत तुम्हारी होगी ।

राह में चलते बस इतना ख़याल रखना
ना टूटे उम्मीद कभी, हौसला ना थमने देना

कदमों को बिना थके,बस यूँ ही

आगे बढ़ने देना ।

--पारुल धीरही


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