कुछ कहना था's image
Poetry1 min read

कुछ कहना था

Pankaj goswamiPankaj goswami June 18, 2022
Share0 Bookmarks 42 Reads0 Likes
कहना तो बहुत कुछ था 
मगर सुनने के लिए कोई नहीं था .
जब सुनने वालों को फुर्सत मिली 
तब शायद कहने वाला कोई नही था 

बिखरा जब में टूट टूट कर 
तब संभालने वाला कोई नही था 
जब सम्भला खुद ब खुद तो याद आया 
खुद ही टूटा था तोड़ने वाला कोई नही था 
 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts