ख़ामोश's image
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ख़ामोश रहो यूं दर्द का प्रदर्शन यहां सबके सामने वाजिब नहीं हैं,
सब अपनी जिंदगी में व्यस्त हैं, यहां पर किसी का समय भी मुफ्त में पाना मुनासिब नहीं हैं,
चल रही है अपनी रफ़्तार से जिंदगी कुछ यूंही,
यहां पर साथ किसी का पाना यूं आसान नहीं हैं,
निकलते है सफर पर अनेकों मुसाफिर यहां ऐसे तो,
लेकिन सबका मंजिल तक पहुंच पाना कोई बच्चों का काम नही है,
दिखते हैं अनेकों चेहरे रोज यहां, कोई हस्ता तो कोई मायूस सा रहता हैं,
भरा इतना कुछ है दिल में कि बस चिंगार मिले और धमाका हो जाए, फिर भी चुपचाप ये दिल रहता है,
ख़ामोशी में ऐसे तो होता बहुत शोर शराबा हैं आजकल,
पर उसके चहरे की चमक आजकल कुछ गुमसुम सी होकर रहती हैं।

© Palash Lalwani

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