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तेरी रुसवाइयों के मारे

रोमिलरोमिल February 16, 2022
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बज़्म-ए-रिंदाँ में बैठे तो मिला सुकून,
वर्ना तेरी रुसवाइयों के मारे हुए हम भी थे।

तुम जो भूले तुमसे सिकवा भी न किया हमने,
वर्ना वीरानियों में चंद यादों के सहारे हम भी थे।

रिंद मिले तो समझा हम ओढ़े फिर रहें हैं कफन,
वर्ना तुम्हे फिर देख मुस्कुराए हम भी थे।

चांद चलता रहा तेरा जिक्र भी निकलता रहा,
तुझे कहें चांद तो सितारों में सनम हम भी थे।

आज बहने दिया अश्क का दरिया,
वर्ना तेरी तस्वीर में सर छुपाए हम भी थे।

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