तेरी गली's image
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मेरी नींद पे उस ज़ालिम का इख्तियार है,

जिसे पाने की सारी कोशिशें बेकार है।

उन के दीदार को खड़े हैं गली में न जाने कितने,

पर मैं जानता हूं की वो कितने समझदार हैं।


खुली जो खिड़की लगा रहमतों का दरवाजा खुल गया,

अब न दिखे जो चांद तो इस कुफ्र का कौन जिम्मेदार है।

चर्चे तो हमारे भी बहुत है उनकी गली में,

वो भी कहते हैं पता नहीं ये किसके इश्क में गिरफ्तार है।


मेरी नींद पे उस ज़ालिम का इख्तियार है,

जिसे पाने की सारी कोशिशें बेकार है।


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