परवाज का दिन's image
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अल्फाजों को तकल्लुफ दें जनाब आज परवाज का दिन है,
जो की हैं जाग जाग के रातें खराब सफर के आगाज का दिन है।

बिछड़े तो मिलेंगे फिर मिल के फिर बिछड़ना है,
सोचना क्या जो हो अंजाम दिल की आवाज़ का दिन है।

ना हिज्र का हो डर ना ही शर्म का परदा,
जो बिखर भी गए आंखो से कुछ मोती समझना जज्बात का दिन है।

नाजों से जिन्हे रखा है पलकों में उनपे कुछ तो असर होगा,
आ गया जो कुछ इशारा तो आज दिल ए बर्बाद का दिन है।

मोहब्बत बुरी है मर्ज अक्सर जान पे बन आए,
बच गए हो जो तुम समझ लो खुदा के सौगात का दिन है।

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