लॉकडाउन's image
Share0 Bookmarks 75 Reads0 Likes

स्वेत रंग दिखलाती उदासी,

काला रंग वो पिया, जो प्रवासी।

पैदल पथ कैसे पार कर पाता है।

कोरोना काल का हृदय विदारक दृश्य ये चित्र दिखलाता है।


सफेद रंग है आस का पूरक,

जैसे उगता हर सुबह सूरज।

उम्मीद की किरण मोहिनी के मन को भाती है,

पाता नहीं भूखी प्यासी पिया की बाट जोहती कब मूर्छित हो जाती है।


अंत है इस कहानी के अलग अलग,

पर कवि कितना बतलाएगा।

है व्यथा जिसके दिल की पर वो कहां व्यक्त कर पाएगा।

हैं जो संतरी और मंत्री उनके लिए गाड़ी आजाएगी,

पाता नही इस मोहिनी के पिया को कौन सी गाड़ी पहुंचाएगी।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts