कोरोना फ्रंट लाइनर्स's image
Zyada Poetry ContestPoetry1 min read

कोरोना फ्रंट लाइनर्स

रोमिलरोमिल January 13, 2022
Share0 Bookmarks 97 Reads1 Likes

छुप सकते थे हम भी बंद दरवाजों के पीछे,

पर फिर तुम्हारा खयाल कौन रखता।

ऐसे भी है समाज में गंदगी बहुत,

सड़कों पे भी फैले बदबू दिल में ये मलाल कौन रखता।


अस्पताल जो पट गए मरीजों से,

हमने भी कमर कस ली,

हुनर जो बक्शा है खुदा ने,

न किया इस्तेमाल ये सवाल जिंदगी भर कौन रखता।

छुप सकते थे हम भी बंद दरवाजों में,

फिर तुम्हारा खयाल कौन रखता।


जो तुम मुसीबत में थे,

पैसों का इंतजाम तो करना था,

माना कोरोना के शिकार हम भी हुए,

पर वक्त पे ना काम आने का,

पहाड़ दिल पे कौन रखता।

छुप सकते थे हम भी बंद दरवाजों में,

फिर तुम्हारा ख्याल कौन रखता।


तुम रहते तो दिल को सुकुन रहता,

तुम्हारी जिंदगी और बेहतर बने इसका जुनून रहता।

तुम जो चले गए हो तुम्हारे बाद,

बच्चों का खयाल कौन रखता।

जो छुप जाते हम भी बंद दरवाजों में,

फिर तुम्हारा खयाल कौन रखता।


(रोमिल)

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts