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हे नारी तुमको नमन

रोमिलरोमिल March 8, 2022
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लाख पर्दों में पड़ी,
जिम्मेवारियों की सूली चढ़ी,
जंगल में छुपे चंदन की तरह,
परेशानियों में भी मुस्कुराती हुई सुगंधरा।

तुम ही सरोजिनी, तुम ही इंदिरा,
तुम्ही प्रगति, तुम्ही सुमति,
ऋद्धि सिद्धि तुम्ही, तुम्ही सावित्री,
सबका पालन पोषण करती तुम वसुंधरा।

परेशानियों में भी मुस्कुराती हुई सुगंधरा।


तुम ही सरस्वती, तुम ही शक्ति,
मैं होता हूं चकित देख भावनाओं की अभिव्यक्ति।
स्नेह, वात्सल्य, अनुशासन की तुम स्रोत,
हो पहली गुरु तुम्ही, तुम ही लक्ष्मी, तुम ही उर्वरा।

परेशानियों में भी मुस्कुराती हुई सुगंधरा।

हे नारी तुम दृढ़ निश्चय की धारा,
नमन स्वीकार करो हमारा,
तुम गंगा, गोदावरी का हो विस्तार,
मानव सभ्यता का आधार।

सबका पालन पोषण करती तुम वसुंधरा।

                               (- रोमिल)

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