गुजरता साल's image
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कान थक गए हैं मास्क के भार से,

सांसें भी आ रहीं है कपड़े के दरबार से,


वैक्सीन की डोज भी बढ़ती जा रही है,

नई नई प्रजातियां जाने कहां से आ रहीं है।


कुछ अच्छा वक्त जो हमने साथ गुजारा है।

क्या मेरे दिल का चैन नहीं तुझे गवारा है।


बच्चे भी थक गए हैं घर में बंद बंद,

शहर की गति भी है मंद मंद,


आंखें ऑनलाइन क्लासेस की मारी है,

वर्चुअल मीटिंग सबको नहीं प्यारी है।


ना जाने कितनो ने अपनो को खोया है,

बाहर से आई हर चीज को साबुन से बार बार धोया है,


तेरा भाई छोड़ गया था कोरोना पिछले साल इसे लेता जा,

ऐ साल गुजर रहा है तू तो हमारा सुख चैन तो देता जा।

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