दिल की बात's image
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सुबह वो न मिले तो शाम का आसरा,

ये दोपहर जालिम कट भी जाए तो जरा,

ख्वाइशें अभी और भी हैं बाकी, 

शाम को जब मिलें चेहरे से नकाब हट भी जाए तो जरा।


दीदार ए हुस्न हो तो चैन मिले,

इस उम्मीद में दिल बहल जाए तो जरा।

आशिकी में हुजूर दिमाग चलता नहीं,

आज शाम ये दिल भी फिसल जाए तो जरा।


ईश्क के दरिया में कस्तियां अक्सर डूबती तो हैं,

तेरी आंखों में मैं भी डूब जाऊं तो जरा।

लब से मैं कुछ न बोलूं तो क्या,

दिल की धड़कनों से बात कह भी जाऊं जरा।

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