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आ गई छठ पूजा

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आ गई छठ पूजा

चलिए अपने गाँव

नेम धरम के परब का

ले छठी मैया का नाम ।

गाँव की छप्पर का लौकी

होगा इंतजार में तेरे

हाट गाँव की बाट जोहती

इंतजार में सूप और दौरे ।

गाँव की सड़कें तेरे झाड़ू

की खातिर आकुल होंगे

दिन गिनते होंगे तेरे

माँ बाबूजी व्याकुल होंगे ।

माना कि इस बार खेत में

लग नहीं पाए धान

पर गेहूँ बोने की

तैयारी में लगे किसान ।

बड़का भैया बड़की भौजी

उनके दोनों बेटे बेटी

सबने टिकट करा ली है

बीत गई दिवाली है ।

घर में चूना करना है

लानी है चिकनी मिट्टी

चार दिनों में ही करनी

काम कई छोटी छोटी ।

छत को धोना गेहूँ बिनना

उसे पिसाना चक्की में

कहीं न मोटा रह जाए

मिल वाले की अकबकी में ।

नेवता देना है प्रसाद का

और कराना है बीजै

दूध नहीं आया रे बेटा

जरा दौड़ के ला दीजै ।

गीत नाद करने आई जो

उनकी खातिर दरी बिछा दो

डाल आम की किधर गई

उससे जाकर दाल चला दो ।

हो गई पूजा जाओ जाकर

सिर पटककर करो प्रणाम

छठी मैया नीके सुखे

रोग दुख सब करें तमाम ।

डगर पड़ रही है देखो

हो गए सब तैयार

पहली अरग सुरुज देव

को पड़नी है आज ।

डलिया लेकर सिर पर रखो

गमछा उसके नीचे डाल

आगे डलिया वाले जाना

तुम पीछे चलना गोपाल ।

आज अरग दूसरा पड़ेगा

चलो चलो उठ जाओ

हो जाओ तैयार सभी

ढंढे पानी से नहाओ ।

व्रती खड़ी है पानी में

लोटा लेकर डालो अर्ध्य

आग जली डलिया के आगे

हुमाध डाली उस पर ?

अब खाओ प्रसाद ठेकुआ

यार दोस्त में बाँटो

गोजनोटा पोछ दूँ आओ

छोटका को बुला दो ।

चलो लौटकर घर को अब

हो सतनारायण पूजा

दे दो मंडलि को नेवता

छोड़ काम सब दूजा ।

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