नया सवेरा's image
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अम्बर के आंगन को देखो कितने इसके तारे टूटे कितने इसके प्यारे छूटे,
पर पूछो टूटे तारों का कब अम्बर शोक मनाता है?
आगे पड़े खुशियों को ढूंढो जो जीने की अलख जगाता है।

भूत के बेड़ियों में जकड़े तुम कब तक दुख को पालोगे,
पीड़ा से बनी सांचे के अंदर क्या खुद को यूहीं ढालोगे?
रात काली है तो क्या फिर नया सवेरा आता है,
हम उस माली के पौधे है जो रोज नए पुष्प उगाता है।

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