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नादान दुनिया

Nivedan KumarNivedan Kumar September 9, 2022
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ये दुनिया अब इतनी भी नादान नहीं है

कि अच्छे-बुरे की इसको अब पहचान नहीं है


क़ायम रहे नहीं जो कहे बात पर अपनी

बे-ईमान है उसका कोई ईमान नहीं है


ज़रा सी मुश्किलों में जो हो जाए परेशां

उनके लिए मेरी जान ये जहान नहीं है


सौदा नहीं करता है भरोसे का कभी भी

ये दिल कोई बाज़ार की दुकान नहीं है


करनी पड़ेगी ख़ूब मशक्कत यहाँ दिन-रात

तक़दीर बदलना बहुत आसान नहीं है


हुनरमंद लोगों की कायल है ये दुनिया

ये सच है इससे कोई अनजान नहीं है


अच्छे हैं लोग गाँव के चाहे ग़रीब हैं

किसी के हाथ में किसी का गिरेबान नहीं है


दुश्मनी के आजकल नुकसान हैं बहुत

अच्छी है दोस्ती कोई नुकसान नहीं है


खूँटी टंगी है आजकल वकीलों की तरह पैरहन

इस शहर में क्या कोई भी परेशान नहीं है


इस शहर में मुश्किल है एक दिन गुजारना

इस शहर में इश्क का कोई मकान नहीं है


सच क्या है अब यहाँ कोई भी बोलता नहीं

किसी के मुंह में क्या यहाँ ज़बान नहीं है


लड़ता रहा हर रोज़ जिंदगी से लड़ाई

चेहरे पे ज़रा सी भी पर थकान नहीं है


जिनके हाथों में फफोले हैं पैरों में हैं छाले

उनके लिए क्या कोई भी वरदान नहीं है


विरसे में मिली जो हमें ज़ुबान की तहज़ीब

गाली-गलौज उसका क्या अपमान नहीं है


लेकर क्या करेंगे हम सम्मान की चादर

पुरखों का अपने जब यहाँ सम्मान नहीं है

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