लोग बहुत कम बाक़ी हैं's image
Poetry1 min read

लोग बहुत कम बाक़ी हैं

Nivedan KumarNivedan Kumar October 10, 2022
Share0 Bookmarks 95 Reads0 Likes

आंख में आंसू रखने वाले लोग बहुत कम बाक़ी हैं

ग़म का रस्ता तकने वाले लोग बहुत कम बाक़ी हैं


थोड़ी सी मुश्किल थोड़ी आसानी थोड़ा पागलपन

ऐसे अल्हड़ सपने वाले लोग बहुत कम बाक़ी हैं


बस कुछ एक चाहत के बदले अपना सौदा करते हैं

अपनी शर्त पे चलने वाले लोग बहुत कम बाक़ी हैं


आग लगाने वाले लोगों की तो है तादाद बहुत

लेकिन आग बुझाने वाले लोग बहुत कम बाक़ी हैं


सबको रोशनी चाहिए है बस किसको चाह अंधेरे की

ख़ुद को दीया बनाने वाले लोग बहुत कम बाक़ी हैं


बहुत मिलेंगे झूठ-मूठ की तारीफ़ करने वाले लोग

सच में कमी बताने वाले लोग बहुत कम बाक़ी हैं


शामिल होती है ये दुनिया बस खुशियों की महफ़िल में

ग़म में गले लगाने वाले लोग बहुत कम बाक़ी हैं


ज़रा सी मुश्किल में हो कोई साथ छोड़ देते हैं सब

अपने, हाथ बढ़ाने वाले लोग बहुत कम बाक़ी हैं

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts