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खुदगर्ज जमाना

Nivedan KumarNivedan Kumar October 7, 2021
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कितना खुदगर्ज है जमाना ये सब जानते हैं

कितने लोग हैं जो लोगों का कहा मानते हैं


छुपाने से नहीं छुपती है असलियत कभी भी

सब यहां झूठ की शक्लें खूब पहचानते हैं


अब ख़ुशी दोस्त बने ऐसी तमन्ना है मेरी

एक मुद्दत से ऐ ग़म तुम्हें हम जानते हैं


अपनी तकदीर खुद-ब-खुद लिखी है जिसने

ये कौन लोग हैं जो खुद को खुदा मानते हैं


ये किसने कब्र पे बनाया आलीशान महल

बुरे लोग हैं ये इंसानियत नहीं जानते हैं

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