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पर्दे के पीछे का सच

Nitin KulkarniNitin Kulkarni February 28, 2022
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"परदे के पीछे का सच"


जिस में तपन नहीं,

अपना प्रकाश भी नहीं,

वह रवि नहीं हो सकता,

जिस मन में, भावनाओं

का निवास ही नहीं,

वह कवि नहीं हो सकता,

जो अंतर्मन, दर्पण जैसा

पाक और साफ नहीं,

वह छवि नहीं हो सकता,

चलचित्र में हो बरखा और

शहर में बाढ़ आ जाए

यह कभी नही हो सकता


नितिन जोधपुरी "छीण"


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