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लोग भाग रहे हैं, बस भाग रहे हैं

वो कहते हैं, लाइफ इज़ ए रेस !

मैं नहीं मानता...

ये केवल एक भ्रम है,

हम किसी भी तरह की दौड़ में शामिल होने नहीं आये,

दौड़ना हमारी प्रकृति ही नहीं है,

यदि होती, तो ईश्वर हमें भी चारों पैर ही देता.

हमारी प्रकृति है, ठहराव...

और जीवन एक पड़ाव है, ठहराव है.

एक अवसर है...

जन्म जन्मांतर की भाग दौड़ से सदा के लिए बचने का.

जो इस ठहराव से हटकर बस भाग ही रहे हैं,

वो सब, अभी पूरे आदमी ही नहीं हुए...

आदमी की योनि में उनका जन्म, शायद अभी बाकी है.


- नितिन कुमार हरित #NitinKrHarit 


#शब्दोंकाघर #quotesaboutlife #जीवन

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