प्रेम का आकाश's image
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प्रेम का आकाश इस अंतरिक्ष से भी वृहद है,

ना कोई ओर छोर, ना ही कोई अंत..!

सो प्रेम को पाने की जिज्ञासा वाले, कभी तृप्त ही नहीं होते,

जितना पा जाओ उससे कहीं अधिक सदा शेष ही रहता है।


- नितिन कुमार हरित

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