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ऑफिस में सांप

Nitin Kr HaritNitin Kr Harit July 24, 2022
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"हास्य व्यंग्य || ऑफिस में सांप || नितिन कुमार हरित"


सुनो सुनाऊं एक कहानी, रूह जायेगी कांप,

एक फैक्ट्री के, एक ऑफिस में, आ गया एक सांप।

भागो, मारो, पकड़ो सब के सब चिल्लाए,

सांप ने सोचा बुरा फंसे अब राम बचाए।


जितने भी थे सब को थी, ये चिंता भारी,

पर सांप भगाने की ना की, कोई तैयारी।

काम करो ना करो, मगर हां जिक्र करो,

कोई पूछे ना पूछे, बस फिक्र करो।


बात जान पर देखी तो मैनेजर बोला,

"सुनो जरा इधर आओ, ओ मिस्टर भोला,"

अपना सुन कर नाम छायी, घोर उदासी,

पर क्या करता भोला? वो था चपरासी।


मैनेजर बोले, "डू यू नो भोला, वाई योर नेम इज भोला"

"मां ने रखा है, बहुत सीधा भी हूं साहेब", भोला बोला,

"ओ नो नो, तुम भोले हो, महादेव हो, तुम त्रिपुरारी,

चलो चलो अब करो सांप पकड़ने की तैयारी।


मरता क्या ना करता, बात समझ ना पाया,

डरता-डरता भोला एक लाठी ले आया।

ये सब देखा तो दो ऑफिसर आपस में बोले,

"खुद तो कुछ नहीं करता, कहता है भोले भोले।


सांप भगाएगा भोला, और नंबर ये पायेगा,

देखना, इस बार भी तेरा प्रमोशन जायेगा"

"अरे, ऐसे कैसे जायेगा", कह के दी इस्माइल,

तुरंत निकाला जेब से स्मार्ट मोबाईल।


"ऑफिस में हैं सांप, बड़ा लंबा, जहरीला,

सीट के नीचे छिप कर बैठा, पीला पीला।

पर इस पर हम मिलकर शिकंजा जकड़ रहे हैं,

चिंता कुछ ना करना हम इसको पकड़ रहे हैं"


ये सब लिख कर, वाट्सअप ग्रुप पे मैसेज डाला,

टूं टूं बज उठा फोन, सभी ने फोन निकाला।

मैनेजर ने टाइप किया, "गुड, शिकंजा जकड़ो जकड़ो,

जो चाहे वो करो, सांप को जल्दी पकड़ो"


इतना लिखकर मैनेजर, फिर फिरसे बोला,

"तुम क्या कर रहे हो? ओ मिस्टर भोला"

"साहेब! बाहर से ये लंबी लाठी लाया हूं ,

कोशिश की है, पर सांप, अभी ना पकड़ पाया हूं"


"व्हाट भोला? योर नेम इज भोला, डू यू नो वाय"

"जी साहेब, मैं हूं भोला , मैं महादेव, मैं शिवाय"

"ओ नो नो, तुम्हारी मां ने रखा है, तुम बड़े सीधे हो भाई,

ये लाठी ऑफिसर को दो, बात समझ में आई ?"


भोला मन में सोचे, राम ने जान बचाई

इतने में ये बात, शॉप फ्लोर तक आई।

"सुनो सुनो, पता चली है खबर भयंकर,

अपनी फैक्ट्री में घुस आए हैं कई विषधर।


ऊपर लाठी वाठी, सब ढूंढ रहें हैं भाई,

पर इन सब ने मिलकर हमसे ये बात छुपाई"

अफरा तफरी मची, गड़बड़ गंद हो गया,

देखते देखते ऐसे, प्रोडक्शन बंद हो गया।


'लाइन इस स्टोप्ड' मैसेज, जैसे ही ग्रुप पे आया,

बड़े साहेब ने अपना फोन उठाया।

वैसे उनको सांप की थी, पूरी जानकारी,

पर बिना प्रोडक्शन रुके, करे कौन तैयारी?


उन्होंने लिखा, ''कहां गई आपकी समझ, आपकी बूझ?

ड्यू टू वन सांप , वी कैन नोट लूज,

सपेरे को बुलाओ, बीन बजवाओ,

जो चाहे करो पर लाइन चलाओ"


येस सर, ओके सर का, फिर देखा खेल निराला,

येस येस लिख कर सब ने, व्हाट्स एप ग्रुप भर डाला।

जिस अलमारी में था सांप, वहीं एक छेंक रहा था,

उसी छेंक से सांप, ये सब कुछ देख रहा था।


सोचे, मैं हूं पागल, अपनी जान फंसा दी,

ऑफिस करके बंद, इन्होंने लाइन चला दी।

अलमारी से निकला, खुद ही बाहर आया,

पर ऑफिस से बाहर का रास्ता, ढूंढ ना पाया।


तभी अचानक, बीन बजाता, आया एक सपेरा,

ऑफिस खुला, देख सांप ने खुद ही छोड़ा डेरा।

सांप को जाता देखा, सपेरा झट से बोला,

"किधर जायेगा बच के", और पिटारा खोला।


डरता मरता सांप, बेचारा भाग ना पाया,

हाथ जोड़ कर बोला, "सुनो सपेरे भाया,

पकड़ो मुझको, ले जाओ, जो चाहे करना,

मेरे लिए एक सा है अब, जीना, मरना।


बस मुझे एक बार, बड़े साहेब से मिलवा दो,

फिर मेरे संग तुम, जो चाहो, करवा दो।"

सांप की देखी हालत, खुद को रोक ना पाया,

लिए हाथ में सांप, सपेरा बड़े साहब तक आया।


साहब बोले "बोलो, अब ज्यादा टाइम नहीं है"

सांप ने बोला, "साहेब एक सवाल है, बाकी फिर जो है सही है,

मैं गलती से आया इधर, देखो, मुझको कैसे जकड़ा है,

पर इस ऑफिस में हैं सब सांप, मुझे ही, क्यों पकड़ा है?


सब के अंदर ज़हर, सब के सब, जलते हैं

ऊपर से कुछ और, अंदर, सब, सबको खलते हैं

मुझको मारो, साहेब मगर बता दो केवल इतना,

ये दो मुंहे सांप यहां पर क्यूं चलते हैं??

ये दो मुंहे सांप यहां पर क्यूं चलते हैं??


- नितिन कुमार हरित #nitinkrharit 


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