माँ का लेख's image
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माँ सी इस संसार में, कहीं मिली ना बात,

शिशु को लेकर गोद में, जागे सारी रात,

जागे सारी रात, सजग प्रहरी के जैसे,

वो जाने या राम, सहे दुख कैसे कैसे,

सुनो 'हरित' ये बात, अयोध्या मथुरा काशी,

तीरथ नगरी कोइ, नहीं है अपनी माँ सी।


लेख लिखे, कविता लिखी, लिखे गीत पे गीत,

गीत न पर कोई लिखा, जिसमें सच्ची प्रीत,

जिसमें सच्ची प्रीत, भला कोइ क्या लिख पाय,

शब्द मिले ना राम, वो जिनमें माँ लिख जाय,

'हरित' लोक परलोक, हैं माँ के भीतर, देख,

माँ को वो क्या लिखे, जो खुद है, माँ का लेख।


- नितिन कुमार हरित

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