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दौड़ रे भाई दौड़

Nitin Kr HaritNitin Kr Harit October 13, 2022
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होड़ मची है, होड़ मची है, होड़ मची है होड़,

दौड़ रे भाई, दौड़ रे बाबू, दौड़ रे बेटा दौड़।


आँख बंद कर, कान बंद कर, छोड़ दे रिश्ते नाते,

जो पीछे रह जाते देख ले, सब के सब पछताते,

जिसकी लाठी भैंस उसी की, जग का यही निचोड़,

दौड़ रे भाई, दौड़ रे बाबू, दौड़ रे बेटा दौड़।


नियम कौन से, नियम कहां के, नियम कोई ना मान,

जो जीता है वही सिकंदर, एक सबक ये जान,

धर्म कर्म बेकार की बातें, इनका पीछा छोड़,

दौड़ रे भाई, दौड़ रे बाबू, दौड़ रे बेटा दौड़।


पके माल के खुआब दिखाकर, माल भिड़ा दे कच्चा,

चोर वही जो पकड़ा जाए, दे दे सबको गच्चा,

हद वद तेरे लिए नहीं है, चल हद सारी तोड़,

दौड़ रे भाई, दौड़ रे बाबू, दौड़ रे बेटा दौड़।


यही सोच कर भाग रहे सब, समझ ना कुछ भी आए,

कोल्हू के हैं बैल, चले पर, पहुंच कहीं ना पाए,

तुझको अपनी राह बनानी, तिनका तिनका जोड़,

भीतर हरित मिलेगा सब कुछ, दौड़ ना कोई होड़।


- नितिन कुमार हरित #NitinKrHarit

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