दर ब दर आदमी's image
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दौड़ता भागता दर-ब-दर आदमी,

एक सफर ही रहा उम्र भर आदमी।


कितना नादान है नासमझ आदमी,

छोड़ता घर की खातिर ही घर आदमी।


राह की मुश्किलों से लड़ा आदमी,

आदमी का रहा एक डर आदमी।


चांद सूरज हवा जानता आदमी,

आदमी से रहा बेखबर आदमी।


अपने दुःख से नहीं है दुखी आदमी,

जल रहा है जलन में मगर आदमी।


~ नितिन कुमार हरित

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