अधखुले बाल's image
1 min read

अधखुले बाल

Nitin Kr HaritNitin Kr Harit January 10, 2022
Share0 Bookmarks 128 Reads1 Likes
कांधों पे लटकते वो अधखुले से बाल,
आधे सूखे, आधे गीले,
कभी कभी सूरज के आगे चमकते हुए,
लरजते हुए, महकते हुए,
चुप भी कहां रहते थे,?
चुपचाप छेड़ते थे शरगोशी सी कोई,
मैंने तो कई बार सुनी है,
उनकी आवाज़,
उनकी आहटे...
जैसे हर बार मुझे ही पुकारा हो !

- नितिन कुमार हरित

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts