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तू आज भी मेरी साँसों में ज़िंदा है

Nitin KhannaNitin Khanna October 7, 2021
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तू आज भी मेरी साँसों में ज़िंदा है



तू आज भी मेरी साँसों में ज़िंदा है

मेरी साँसे हैं, क्योंकि, तू ज़िंदा है


भूल के भी न भुला दूँ, ऐसी भूल की

तुझे इतना चाहा, बस यही भूल की


मुस्कुराहट की चाह में, अपने से बैर

इस चाहत में, अपने अधरो से किया बैर


रहा मेरा इश्क़ हमेशा एकतरफ़ा, क्यों ?

तेरी चाहत, में कभी न बना, क्यों ?


तुझे चाहना जीने का दस्तूर बनाया, क्यों ?

ज़िन्दगी में बाकी खुशियां ठुकराई, क्यों ?


अब कोई और है, मेरे अधरों की मुस्कुराहट

साँसों से तुझे आज़ाद किया, यूँ ली करवट



नितिन खन्ना



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