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पीपल के झूले का इंतजार पूरा हुआ है शायद,

हवा के झोंके ने उसे कुछ यूं झुलाया होगा।


चिड़ियां चबूतरे पर लौट आयी हैं,

कोई भटका हुआ मुसाफिर इस गली आया होगा।


छत पर मिर्च के अचार की महक फैली है,

वो सर्दी के मौसम की धूप लाया होगा।


इक नई सी रोशनी फैली है घर में,

उसने आंगन की तुलसी पे दिया जलाया होगा।


चौखट पे नई सी चमक है,

वो शायद अपना बचपन समेट लाया होगा।


यादों के तहखाने से कितनी बातें आज़ाद होगी।

वो ख्वाबों के लिफाफे भरी जेब लाया होगा।


चारों ओर एक जानी पहचानी रंगत निखरी है।

वो प्रेमिका के गजरे के फूल लाया होगा।


अम्मा - बाबा के चेहरे पे आज मुस्कान बिखरी है,

बरसों बाद वो शायद दीवाली पर घर आया होगा।


भारी से बस्ते लिए,

मन में सुकून के रास्ते लिए,

वो घर दौड़ आया होगा।

अब लगता है की त्योहार की दस्तक है,

सबके आंखों का तारा,

दिवाली का दीपक घर आया होगा।


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