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प्यार :एक ख्वाब

nishantparkharnishantparkhar October 10, 2022
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प्यार :एक ख्वाब


ये याद भी कैसी याद ,

जिस याद में केवल नफरत हो ।

पता नहीं ये प्यार भी कैसा प्यार ,

जिस प्यार में केवल बिछड़ना हो ।



मैं चाहता था प्यार करूगाँ ,

प्यार चाहता था सबक सिखाऊगाँ ।

प्यार तो हुआ ही नहीं , 

पर सबक भी सीख लिया हूँ ।


ना जाने ये तर्पण कैसी थी,

तुमसे प्यार करने का ।

ना जाने ये सोच कैसा था, 

तुमसे बातें  करने का।


सबक भी सीख लिया हूँ ,

अब दूसरे को नहीं आने देंगें ।

दिल चाहता है मेरा ,

तुझे भी नहीं जाने देंगें ।


इच्छा तो बस सपना रह गया,

अपनों से बात करने का ।

ख्वाब तो बस दिल में ही रह गया,

अपनों से प्यार करने का ।

           

               -निशांत प्रखर 

               खगड़िया ,बिहार 

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