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यात्राएं, यथार्थ की ओर !

Nishant PandeyNishant Pandey October 2, 2022
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कुछ रास्तों को तय करने

से ही समझ आता है कि ,

कितना और चलना पड़ेगा,

खुद तक पहुंचने के लिए।


इन यात्राओं की कोई ,

मंजिल नही होती,

सिर्फ रास्तों का पता ही,

मालूम होता है।


सफर में कुछ मुलाकातें,

मुकम्मल हो जाती हैं,

तो कुछ रह जाती हैं,

यादों में आखिर तक।


बिना ठहराव के ,

चलना ही नियत होता है,

ये यात्राएं परिचय कराती हैं,

अपने देव और दैत्य से।


बहुत मुश्किल होता है,

मिलना अपने यथार्थ से,

उसे स्वीकारना और बदलना, 

थोडा और बेहतर बनने के लिए।


पर सबसे मुश्किल होता है,

खुद का हाथ पकड़ना,

और खुद से ये कहना,

चलो उठो, तैयार हो जाओ,

फिर से चलने के लिए I

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