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तुम कम पड़ जाओगे !

Nishant PandeyNishant Pandey May 6, 2022
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लिखना चाहता हूँ , 

कुछ हजारों बातें ,

जो कभी कह ना सकूँ,

पर शब्द कुछ कम पड़ जाते।

पढ़ना चाहता हूँ,

हर एक बात ,

जो लिखी गई हो,

इस मानव इतिहास में,

पर वक़्त कुछ कम पड़ जाता।

सीखना चाहता हूँ ,

हर एक जुबान,

जिसमें इंसान ने,

कही हो दिल की बात,

पर ज़ज्बात कुछ कम पड़ जाते।

सुनाना चाहता हूँ,

अपनी एक कहानी ,

जो यूँ ही लिख दी हो,

पर अंजाम कुछ कम पड़ जाता।

जिस रोज़ ,

मुकम्मल हो गए ये सब,

अफसोस उस रोज़,

तुम कुछ कम पड़ जाओगे ।


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