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शहर की बातें

Nishant PandeyNishant Pandey January 22, 2023
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सर्द शहर की बातों में,

जब भी तन्हा मै होता हूँ ,

यादों के अलाव जलाता हूँ ,

खुद भी थोड़ा सा जलता हूँ ।


लफ्ज़ों के गर्म लिहाफ़ो में,

सोने की कोशिश करता हूँ ,

कुछ ऐसे बिछड़े ख्वाबों को ,

जीने की कोशिश करता हूँ ।


जब भी सर्द मै पड़ता हूँ ,

ख्यालों में उलझने लगता हूँ ।

शब्दों के रंगी स्वेटर को,

कुछ ऐसे बुनने लगता हूँ ।


कांपते ठीठुरते रुह को,

तस्वीरों में उलझा देता हूँ,

फैले बेतरतीब ख़लिश को,

एक नर्म सहारा देता हूँ ।


बदहवास दौड़ते शहर में,

जब खुद को खोने लगता हूँ ।

सुनसान पड़ी इन रातों में,

चांद को तकने लगता हूँ ।


बेमानी लगते वादों को ,

फिर से जीने लगता हूँ ।

वीरान पड़े इन राहों को,

कुछ कदम मै चलने लगता हूँ ।


सर्द शहर की बातों में,

मै जब भी तन्हा होता हूँ ।

प्रीत की लौ जलाता हूँ ,

खुद भी थोड़ा सा जलता हूँ।

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