इन्तज़ार ...'s image
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मुझे मालूम है ,

तुझे मेरा इन्तज़ार रहता है।

तेरी दहलीज पर ,

एक दिया बुझा-बुझा सा रहता है।


क्या नुमाइश कराऊं ,

फटेहाल इश्क का मै !

तेरी महफिलों में ,

हजरातों का मजमा लगा रहता है।


तेरा ज़िक्र ,

मेरी अज़ान में होता रहता है ।

खुदा भी पूछता है ,

तू इतना परेशां क्यूं रहता है ।


इस बार जो गुजरा ,

तो आवाज़ दूंगा तुझे

तेरी चिलमन का ,

एक सिरा खुला खुला सा रहता है ।


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