मेरी कविताएं's image
Poetry1 min read

मेरी कविताएं

Nishant PandeyNishant Pandey January 11, 2022
Share0 Bookmarks 131 Reads1 Likes

अगर तुम्हें कभी मेरी याद आए,

तो इन कविताओं को पढ़ना,

हाथों की लकीरों को 

मैंने स्याही में डुबोया है,

तब जाकर कागज पर कुछ उकेरा है।


आंगन में इधर- उधर

बिखरे रहते थे कमबख्त,

एक चांदनी रात में अचानक से

पकड़ कर डायरी में बंद कर दिया मैंने।


तुम्हें इनको समझने में

थोड़ी मशक्कत तो होगी ,

ये वही बंजारे ख्याल हैं 

जिन्हे तुमने ना सुना कभी,

और दहलीज से हमारी

तुम लौट गए थे तभी। 


वक्त के तराजू में

तौला है मैंने जिंदगी ,

नफा - नुकसान तो

मैं सोच ही न पाया कभी ,

जिस रोज़ तुम रुबरू होगे डायरी से मेरी,

उस रोज़ इब्तिदा होगी मेरी कविताओं की। 











  

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts