बारिशें और मोहब्बतें's image
Poetry1 min read

बारिशें और मोहब्बतें

Nishant PandeyNishant Pandey October 31, 2022
Share0 Bookmarks 163 Reads3 Likes

बारिशों के मौसमों  को यूं ही जाया ना कर,

वो जब मिलने बोले तू भी उसे हमसाया कर।


बीत गया जो मौसम तो तू बहुत पछताएगा,

वक्त रहते इश्क को तू भी कभी जताया कर।


दुनियादारी में खुद को यूं मत उलझाया कर,

बारिशें हो तो साथ थोड़ा भींग जाया कर।


महबूब को मोहब्बत से मोहताज ना कर,

वो जब चाय बनाये तू थोड़ी अदरक मिलाया कर।


पता नहीं अंजाम क्या होगा इश्क का हमारे ,

बेसब्रियों को कभी उस से भी मिलवाया कर ।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts