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बारिशें और मोहब्बत

Nishant PandeyNishant Pandey October 29, 2022
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बारिशों के मौसमों को यूं ही जाया ना कर ,

वो जब मिलने बोले तू भी उसे हमसाया कर ।


बीत गया जो मौसम तो तू बहोत पछताएगा ,

वक्त रहते इश्क को तू भी कभी जताया कर ।


दुनियादारी में खुद को यूं मत उलझाया कर ,

बारिशें हो तो साथ थोड़ा भींग जाया कर।


महबूब को मोहब्बत से ऐसे मोहताज ना कर ,

वो जब चाय बनाये तू थोड़ी अदरक मिलाया कर।


पता नहीं अंजाम क्या होगा मोहब्बत का हमारे,

बेसब्रियों को कभी उससे भी मिलवाया कर ।

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