अकेला चाँद's image
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कहीं दूर अपने गांव ,  

खाट पर बैठा है एक चाँद।

सहस्त्र सितारों के होते भी, 

आज अकेला बैठा चाँद ।

शायद किसी की यादों में ,

खोया- खोया लगता चाँद।

आज उदासी ऐसी छाई ,  

लोरी में नहीं जाता चाँद ।


क्या हुआ ? तू गुमसुम क्यूँ है?  

क्या ऐसे अच्छा लगता चाँद !

आ जा तुझे घूमा दूँ मैं ,   

छोटा-सा प्यारा अपना गांव।

अलाव जला हम काटेंगे ,

ये सुनसान घनेरी ठंड़ी रात।

पश्मीने जैसी रात में हम दो,

मिल बैठ करेंगे अपनी बात।


जैसे तू चुप है तारों से ,

मैं भी चुप सा हूं यारों से।

दिल में कैसी है गांठ बंधी,

जो सुलझ ना पाए बातों से।

दिल बच्चे जैसा होता है,

इसे बहलाये रखना पड़ता है।

तमाम उम्र फिर कट जाती है ,

चुप्पी भरी ऐसी रातों से ।



Photo Credit - Social Media








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