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शहर जिसे कहते हैं मेरठ...

Nishant JainNishant Jain June 16, 2020
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शहर मेरे तू मेरी मुहब्बत, तू है मेरी जान,

गंगा-जमुनी आन-बान की तू सच्ची पहचान।


शहर-छावनी में सोया है, सदियों का इतिहास,

महाभारत से जंग-ए आज़ादी तक का अहसास,

सन सत्तावन की क्रान्ति की, तूने छेड़ी तान।


हिन्दी -उर्दू के लफ़्ज़ों में, तेरी महक समाई,

मन्त्र-अजानें-गुरूबानियाँ, तूने सदा सुनाईं,

शान्ति-अमन की परम्परा का, बना रहे सम्मान।


हर जुबान में घुली तेरे, गन्नों की ग़ज़ब मिठास,

गज़क-रेवड़ी स्वाद बिखेरें, मेरठ का वो ख़ास,

काली पलटन-घंटाघर-नौचंदी तेरी शान।


सपनों के आज़ाद परिन्दे, भर लें वो परवाज़,

देश और दुनिया में गूंजे, तेरी ही आवाज़,

कायम रहे क़यामत तक तू, इतना सा अरमान। 

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