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धूम मचाती रंग जमाती,

मन को भाती है ई-मेल।

 

चुटकी भर में दौड़ी जाए

एक पल में जवाब पहुँचाए,

कुरियर या स्पीड पोस्ट हो

इसके आगे हैं सब फेल।

 

चिट्ठी लंबी-चौड़ी कितनी

फाइलें साथ लगी हों जितनी,

बड़े-बड़े संदेशे ढोए

जैसे हो बच्चों का खेल।

 

बस साइबर कैफे पर जाना

या ब्रॉडबैंड कनेक्शन लाना,

डाक-कुरियर के खर्चों को

अब क्यों मोनू-पिंकी झेल।

 

जगह-जगह के बच्चे आएँ

भाँति-भाँति के मित्र बनाएँ,

अपनी खुशियाँ सबसे बाँटें

हो जाए दुनिया का मेल।

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