शाम's image
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वो भी क्या हंसी शाम थी जब तू मेरे साथ थी 
चाँद की सजी तारो संग बारात थी, मैं खोया रहा जुल्फों में तेरी और तू  बहकाती रही फिर क्यों छोड़ा मुझे जब मेरे ही नाम तेरी जान थी 
Siya..........

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