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अंजाना इश्क part-6

siya Raghuwanshisiya Raghuwanshi July 2, 2022
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सिया- यार पूजा मुझे ना अब कुछ समझ नहीं आ रहा है कि डायरी में ऐसा क्या पढ़ लिया उस बबुचक ने की मुझे इतनी बड़ी नौकरी दे दी 

पूजा- यार तू हमेसा कहती है ना कि जब कुछ बुरा हो तो डरों मत ब्लकि उसका सामना करो फिर कुछ अच्छा जरूर होगा तू समझ ले कि तेरे साथ उस दिन बुरा हुआ था उसके बदले में आज अच्छा हो गया बस 

सिया- ठीक है जो भी हो मुझे नौकरी तो मिली चलो by 

सिया घर वापस आती है वो सोने की कोशिश करती हैं लेकिन उसे वो बात सोने नहीं देती की इतनी लड़ाई के वाद की कोई किसी को नौकरी कैसे दे सकता है उन्होंने मुझे नौकरी क्यों दी मुझे पहले ये जानना होगा 

सिया अगले दिन ऑफिस जाती है और अभिषेक के आने का इंतजार करती है इतने में अभिषेक उसे अपने केबिन से देखता है और उसे अंदर बुलाता है 

अभिषेक- अब क्या है 

सिया- कुछ तो नहीं 

अभिषेक- मुर्ख लड़की मेरा मतलब है कि अब तो तुम्हें नौकरी मिल गई ना फिर अब क्या है यहा क्यों बैठी हो जाओ जाकर अपना काम करो जाओ 

सिया- नहीं मुझे यहां काम नहीं करना 

अभिषेक- और वो क्यों महारानी जी

सिया- मुझे ये सवाल बहुत परेशान कर रहा है कि अपने मुझे नौकरी क्यों दी आखिर डायरी में ऐसा भी क्या था कि आप मुझे नौकरी देने के लिए मजबूर हो गए पहले मुझे ये बताओं तभी मैं यहां नौकरी करूंगी 

अभिषेक- एक तो मैंने तुम्हें नौकरी दी ऊपर से तुम मुझसे ये सवाल पूछ रही हो 

सिया- इतनी महाभारत बोलने से अच्छा था कि काम के दो शब्द ही बोल देते बताए मुझे नहीं तो मैं चली 

अभिषेक- तुम्हारी डायरी लेकर मैं अपने दोस्त जय के पास चला गया और उसने तुम्हारी डायरी पढ़ ली उसे तुम्हारी सायरी और कवितायें अच्छी लगी और उसे एक writer की जरूरत भी हैं और तुम्हें writer बनना नहीं है तो मैंने सोचा कि वो तुम्हें नौकरी पर बुलाकर परेशान करे उससे अच्छा होगा कि मैं ही तुम्हें नौकरी पर रख लू इससे तुम्हारा भी नुकसान नहीं होगा और उसका फायदा भी रुक जाएगा 

सिया- पर आप अपने ही दोस्त का बुरा क्यों चाहते हैं वो तो आपके दोस्त है ना फिर तो आपको उनकी मदद करनी चाहिए मेरी नहीं में तो आपके लिए अजनबी हूँ ना जो आदमी अपने ही दोस्त की मदद नहीं कर सकता उसे एक अजनबी की इतनी चिंता किस लिए 

अभिषेक- बस कहने को दोस्त है वो मेरा जुबिन भाई की बजह से दोस्त कहता हूँ मैं उसे नहीं तो वो दुनिया का सबसे बड़ा दुश्मन है मेरा और सारी बाते जान ली है ना तुम ने अब जाओ और जाकर काम करो नौकरी छोड़ने का तो सोचना भी मत कम से कम एक महीने तक क्योंकि कल जो पेपर आपने साईन किए थे ना ऐसा उन्हीं में लिखा था कि आप एक महीने तक ये नौकरी नहीं छोड़ सकती है समझी आप अब जाओ अपना काम करो और मुझे अपना काम करने दो 

सिया अपना काम करने लगती हैं ऑफिस से छूटते ही वो पूजा के पास जाती है 

पूजा- क्या बात हैं सिया आज तू घर नहीं गई 

सिया- हाँ वो कभी कभी बस जरा late हो जाती है इसलिए मैं कुछ दिनों के लिए यही रुक गयी हूँ 

पूजा- चल अच्छा है अब तो हम बैठ कर बाते कर सकते है क्योंकि तेरी बस की टेंशन कम हुई चल बता क्या बात हैं इतनी परेशान क्यों है क्या हुआ ऑफिस का पहला दिन कैसा गया तेरा 

सिया- कोई इतना बुरा कैसे हो सकता है कि मुह पर कुछ और  और पीठ के पीछे कुछ और 

पूजा तू कहना क्या चाहती है सिया 

सिया " देखो इज़्ज़त वो नहीं होती जो मुह पर दी जाए इज़्जत  वो होती है जो पीठ के पीछे दी जाय " 

क्योंकि हमारे सामने तो कोई भी हमारी तारीफ कर देगा 

अभिषेक वो नहीं है जो वो दिखाई देता है वो तो कुछ और ही है 

पूजा- हाँ देखने में खड़ूस पर दिल का नेक बड़ा प्यारा है वो 

सिया ये सुन कर पूजा के सर पर मारती है तुझे और कोई काम नहीं है उस पागल की तारीफ के अलावा हाँ मैं जो कह रही हूँ उसे समझ 

पूजा- अच्छा ठीक है चल बोल की तू क्या कह रही हैं 

सिया- मैं बस तुझ से इतना कह रही हूँ कि वो बुरा आदमी है 

सिया ऑफिस की सारी बात पूजा को बताती हैं 

पूजा- अब तुम जरा अपने दिमाग़ से सोचो की वो बुरा होता तो तुम्हें सब कुछ सच सच क्यों बताता वो तुम से कोई भी झूठ बोल सकता था लेकिन उसने ऐसा नहीं किया क्यों क्योंकि वो बुरा नहीं है समझी तू देख उसके मन में चोर था और उसने तुझे वता दिया तो वो बुरा कैसे हुआ वो चाहता तो तुझे कुछ भी कहानी बता सकता था जूठ मूठ की और तू कभी सच पता भी नहीं कर पाती लेकिन उसने ऐसा किया क्या नहीं ना अब तू अपने दिमाग से सोच की वो बुरा है या अच्छा है और रात बहुत हो चुकी है सोना जा कल सुबह जल्दी उठकर time पर पहुंच जाना क्योंकि मैंने सुना है कि वो देख ने में इतना सुन्दर है ना डाटता भी वो उतना ही अच्छा है चल by

सिया उसी के बारे में सोचती है कि वो अच्छा है या वो बुरा है यही सोचते सोचते सिया सो जाती है और सुबह उठ ने मैं let हो जाती हैं पूजा आकर उसे जगा ती है 

पूजा- बोला था ना कि जल्दी उठ ना 

सिया- बस दो मिनिट रुक जा मैं अभी तैयार होकर आती हूँ 

सिया जल्दी तैयार होकर आती है और पूजा उसे ऑफिस छोड़ कर अपने ऑफिस जाने लगती है 

पूजा- सिया ध्यान से कोई डाट दे तो सुन लेना क्योंकि गलती आज तेरी ही है आज तू let है 

सिया- तू मेरी चिंता मत कर मैं सब सम्भाल लुंगी यहां सुन thank you by सायं को मिलते हैं 

अभिषेक ऊपर खड़े खड़े सारी बाते सुन लेता है आने दो अंदर इस सिया को अभी बताता हूं let होने की सज़ा 

सिया जैसे ही अन्दर जाती है 

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