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पहले नहाई ओस में, फिर आंसुओं में रात

यूं बूंद-बूंद उतरी हमारे घरों में रात।

आंखों को सबकी नींद भी दी, ख्वाब भी दिए

हमको शुमार करती रही दुश्मनों में रात।

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