बचपन's image
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झोला टांगे कंधों पर, बचपन को चहकते देखा।
नन्हे फूलों को खुद अपनी, खुशबू में महकते देखा।
कल की कोई फिक्र नहीं, आज को खुल कर जीने वाले
खिलखिलाते चेहरों को, बेफिक्री से हंसते देखा।।
आंखों में चमकीले सपने, इनके कोमल हृदय की बातें
कोई नहीं तय कर पाएगा, इनकी कोई सीमा रेखा।।
-स्नेहा

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