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बात शब्दों की नहीं सम्मान की थी

PrernaPrerna February 28, 2022
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बात शब्दों की नहीं सम्मान की थी,
उस आँगन में हुए अपमान की थी.

अम्बक में उन्नत पीड़ा का आभास कर पाता कोई,
बिलखती ह्रदय की सुन पाता कोई,
माता जानकी के स्वाभिमान को ना तपना होता अग्नि में,
दक्ष पुत्री भी सती ना हुई होती.

तर्क मेरा महादेव से है,
प्रश्न कुछ स्वयं से भी हैं.
कैसी विवस्ता इस निष्ठुरता की थी
महादेव की पराधीनता की थी.

बात शब्दों की नहीं सम्मान की थी,
 नारी की स्वाभिमान की थी.

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