निज कर्मपथ 

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निज कर्मपथ       (नीरज शर्मा)

Neeraj sharmaNeeraj sharma February 27, 2022
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     निज कर्मपथ 
     (नीरज शर्मा)

तु गिरा,तु उठा,तु चला।
फिर गिरा,फिर उठा,फिर चला।
उठता,गिरता,चलता तु चला।
कर्मपथ पे हर कर्म करता तु चला।
जीवन‌ ना रूका तु गिरा या चला।
थकता,रूकता,कभी रोता, कभी हंसता चला।
तु थका तु रूका तो जग हसां तु फिर चला।
कोई बिछडा,नया मिला तु ले साथ चला।
किसी का साथ छोड़ तु चला।
किसी की तोड़ आस तु चला।
पुराना तोड नया बनता तु चला।
कभी देर से,कभी पहले आस तकता तु चला।
तु कभी खुद को शैतान समझ चला।
तो कभी खुद को भगवान समझ चला।
पर मिला सब जब इंसान बन चला।
ये चला,कभी वो चला अंत सब को ले चला।
कौन किसी के कभी साथ चला।
तु अकेला चला ले कर्म अपने साथ चला।
अंत यही की तेरा कर्म ही तेरे साथ चला।
चलता चल स्वच्छ कर्मपथ पर तु चला।
कर्म वहीं जिस कर्मपथ पर तु चला।
बना कर्मपथ को विजयपथ तु चल चला।
कर प्रणाम प्रभु को कर्म कर बढ़ता चला।
कर प्रतिज्ञा निज कर्मपथ पर तु चला।
चला निज कर्मपथ पर तु चला।
निज कर्मपथ पर तु चला।
निज कर्मपथ पर तु चला।।

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