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लीडरों की डीब्बरी टाईट

Neeraj sharmaNeeraj sharma January 14, 2022
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   लीडरों की डीब्बरी टाईट
            (नीरज शर्मा)

है चल रहा फिर से चुनावो का इस समय दौर, 
है मच रहा बस इसी का चारो ओर भारी शौर, 

हर पार्टी मांग रही है हाथ जोड़ के वोट,
बहा रहे जीत के लिए पानी की तरह नोट,

कोई मांगे वोट दे दो तुम मेरी इस जात पर,
कोई चाहे वोट ले लू जनता से बस बात कर,

कोई सोचे मिलेगी वोट दूजे की काट से,
कोई माने ले लो वोट जनता को बांट के,

किसी को बस पैसे पर अपने भरोसा है पूरा,
किसी को भरोसा दूजे का काम पड़ा है अधूरा,

कई तो फ्री में आज है राशन‌ तक भी बांटते,
कई जा के लोगो के हैं तलबे तक भी चाटते,

कुछ तो बाते करते हैं आधुनिक समाज की,
कुछ बातें अजब हैं बताते प्राचीन विवाद सी,

कितने यहां लोगो को झूठे सब्जबाग दिखाते,
कितने ही यहां बायदो से है सारी दुनिया हिलाते,

कई तो घर गरीब के जबरदस्ती आ रोटी हैं खाते,
कई है घर गरीब के बस फोटो खिंचवाने ही आते,

कोई कहता घर घर सरकारी नौकरी हम देंगे,
कोई कहता तुम्हारे रोजगार की गारंटी हम लेंगे,

कई है कहते स्कूल कालेज बिना फीस के चलेंगे,
कई तो कहते रिश्वत खोर घर बैठे बस हाथ मलेंगे,

कितने कहते कानून व्यवस्था में सुधार हम करेंगे,
कितने कहते लैपटाप जीतते ही सब को ले के देंगे,

कोई कहता हर महिला को हजार रुपए देकर रहेंगे,
कोई कहता बुढ़ापा पेंशन बढा कर हम सांस लेंगे,

कुछ हैं कहते नशे की जड़ अब उखड़ के रहेगी,
कुछ हैं कहते अफीम तुम्हारे खेत में अब उगेगी

कोई खुद को अब तो आदमी आम सा ही बताता,
कोई खुद को जनता में अब गरीब सा है दिखाता,

अब सोचना है इस जनता ने किस को है जीताना,
अब सोच लो ये रिश्ता पड़ेगा पांच साल नीभाना,

चोर लीडरों को देखते ही जनता सरपट है भागती,
चोर लीडरों की डिब्बरी है अब वो कसना चाहती,

अब भी वक़्त है सोच लो जनता किसको है जीताना,
जीत गया जो उससे रिश्ता पांच साल पड़ेगा निभाना

इन्होंने किसी ने कुछ नही करना,जो भी करना हमने है करना,
सोच समझ के अब तुम चलना,इन से अब बिल्कुल ना डरना। 
-नीरज शर्मा(9211017509)

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