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करण-अर्जुन युद्ध

Neeraj sharmaNeeraj sharma December 31, 2021
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          करण-अर्जुन युद्ध
             (नीरज शर्मा)


काली अंधेरी रात सा चढ़ता लगे सवेरा,काल संग काली रात से ही निकलेगा तेरा बसेरा।

वो सामने खड़ा जो योद्धा वो कोई साधारण नहीं, महाकाल सा विचर रहा प्राणों का उसे मोह नही, महापराक्रमी कर्ण से ही जीतना तुम्हें युद्ध है, यही तो अभिमान दुर्योधन ‌का अति शुद्ध है।

हे माधव मैं हूं जानता इसके पराक्रम और शौर्य को, आने दो मेरे सामने आज इस सूर्य पुत्र को, गाण्डीव की टंकार इसको वाणी काल की लगेगी,आज रण में भेदूंगा मैं इसके अभिमान को।

सुनके वाक्य पार्थ के मंद मंद प्रभु मुस्कुरा रहे,देख रहे थे सामने क्षण मुश्किल के आ रहे,वो तो जानते अच्छे से कर्ण नाम के इस ज्वार को,तिनके भांति ले जाएगा बहा अर्जुन को साथ वो,

एक दूसरे के सामने वीर वो दोनो आ खड़े थे,आंखो से दोनो अंगारे से बरसा रहे थे,टंकार तो गाण्डीव की तेज गर्जना कर रही थी, आवाज सिंहनाद की विजय धनुष से आ रही थी।
 
बाणो की गंगा रक्तपात करती आज बह रही थी,इस महासमर में मृत्यु मृत्युंजय की ओर आ रही थी,हर कोई खड़ा चकित सा देखता यह दृश्य था,धारण किए थे रूप दोनो महादेव प्रभु शम्भु सा।

कर्ण अपने शौर्य के आज तो चरम पे था,बाण उसके चल रहे थे प्रचण्ड वाणी वेग से, शत्रु दल में भय का वातावरण सा छा रहा था,रण में आज स्वंय यमराज मौत को नाच नचा रहा था। 

कर्ण के बाणो ने आज पार्थ छलनी कर दिया था, वाणो ने पार्थ के भी दानवीर को ड़स लिया था,लाल शौणित रक्त जलधारा सा बह रहा था,आज रण पे इन दोनो का युद्ध कौशल छा रहा था।

युद्ध की निर्णायक घड़ी मानो अब आ गई थी,तकक्ष पुत्र कर्ण के तरक्ष में आ मिला था,खींच कर जो डोर धनुष की कर्ण ने छोड़ा उसे,चल पड़ा तकक्षपूत लेने धनंजय के प्राण था।

अर्जुन इस आयुद्ध से बिल्कुल अंजान था,आ रहा था फंदा उसके काल का अब पास था, प्रभु रथ थे अपना तुरंत धरती में धंसा दिए, कर्ण के ह्रदय पर‌ थे आघात गहरा लगा दिए।

अर्जुन विचलित सा देख रहा कर्ण को था,अंग राज  बरसों से तरसा इसी क्षण को था, बोला गोपाल शीश पार्थ का मैदान में अभी गिरा दूंगा, आज सब के सामने शौर्य प्रचण्ड दिखा दूंगा।

यह तो अधर्म बोल अपने प्रभु को सुना रहा था, मानों गीत पाप अपने स्वयं ही गुन-गुना रहा था, कर्ण ने बस तीर अपना कमान पे चढ़ा लिया था,उसके छोड़ने से पहले सूर्य इशारा केशव का पा लिया था।

अस्त हुआ सूर्य बचे पार्थ के प्राण, कर्ण की आंखें दे रही थी माधव को सम्मान,प्रभु प्रशंसा कर रहे शौर्य देख उसका महान,बोले कर्ण योद्धा तुम प्रभु महादेव के समान,कीर्ति सदा जग में बने तुम्हारी पहचान।

काली अंधेरी रात सा चढ़ता लगे ये सवेरा,काल के ही संग काली रात से निकलेगा तेरा बसेरा।                       
 (नीरज शर्मा-9211017509)

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