जय जयकार सनातन's image
2 min read

जय जयकार सनातन

Neeraj sharmaNeeraj sharma December 31, 2021
Share0 Bookmarks 57 Reads1 Likes
     ् जय जयकार सनातन
       (लेखक-नीरज शर्मा)


मैं सनातन,मेरा धर्म सनातन,रोम रोम मे बसा सनातन,विश्व का है आधार सनातन,पहली सभ्यता धर्म सनातन,सब धर्मों का है धर्म सनातन।

जहां पत्थर में श्रीराम दिखें,गऊ को माता का मान मिले, जहां श्री भगवत गीता का ज्ञान मिले, जहां जीवन का सिद्धांत मिले,वही कहलाए धर्म सनातन। 

तीनों देवों की शक्ति सनातन, भगवती दुर्गा का तेज सनातन,ना सहता ना करता जुल्म सनातन, हर यज्ञ हवन का पारितोषिक सनातन।

श्री तीर्थंकरों की जड़ भी सनातन,भगवान बुद्ध की शिक्षाएं सनातन,गुरु साहिबान भी थे रक्षक जिसके वो  कल्याण का मार्ग है संनातन।
  
मनुज की इच्छाओं पर है अंकुश सनातन,हर धर्म को आदर देता सनातन, प्राणो से बढ़ कर हमें प्रिय सनातन, हम सब का है जीवन सनातन।  

इस से ही सृष्टि सजीव है दिखती, सनातन ही बढ़ाता जीवों में प्रिती,सृष्टि में दिखें अनगिनत रहस्य,सुलझाता उनको सिर्फ सनातन।

मन अच्छे से ये सब जानता, सनातन को ही है पहचानता, सनातन‌ के अंग बेद,पुराण जिससे सृष्टि चलायमान, हर धर्म ग्रंथ में उपस्थित सनातन।

इसी से बहते हवा और जल, अग्नि, बर्षा और रहें स्थान अचल,देवों का महा ज्ञान सनातन, साधु,संत-महात्मा का आदर्श सनातन।

विश्व शांति मांगे सनातन, विश्व कल्याण चाहे सनातन, विश्व संस्कृति की पहचान सनातन, विश्व मानता गुरु है जिसको वो कहलाता धर्म सनातन।

है भारत का अभिमान सनातन, है शिक्षा का भण्डार सनातन, दिखाता रहेगा रास्ता सब को, बसा रहे सदा धर्म सनातन, होती रहे तेरी जय जयकार सनातन।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts